लाशोंसे भरी गद्दीपर चैन की नींद सोनेवालों !
तुम्हारे करोडों रुपये इसकी कीमत नहीं कर सकते
गोलियोंकी बारिशोंसे ये शांती-फूल खिले है
अपना खून बहाकर हमने आपकी शांती सींची है
मजहब के नाम पर बंदूकें उठानेवालोंको
कोई ये भी जाकर बता दे की आखिर,
वतन नाम का भी एक खुदा होता है,
देशभक्ती नाम का भी एक मजहब होता है !